भारत में बुनियादी साक्षरता (Foundational Literacy) में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है, विशेषकर NIPUN भारत मिशन के बाद। किंतु इसके समानांतर बुनियादी गणितीय दक्षता (Foundational Numeracy) में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। नवीनतम सर्वेक्षणों — विशेषकर ASER 2024, NAS 2021–23, तथा पोस्ट-पैंडेमिक आकलनों — से यह स्पष्ट होता है कि देश में एक गहरा और संरचनात्मक Literacy–Numeracy Divide मौजूद है। यह अंतर न केवल सीखने के परिणामों को प्रभावित करता है बल्कि उच्च शिक्षा, रोजगार क्षमता और आर्थिक गतिशीलता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
1. न्यूमरेसी गैप: अवधारणा और वर्तमान स्थिति
न्यूमरेसी गैप वह स्थायी अंतर है जो बच्चों की पढ़ने की क्षमता (reading proficiency) और गणितीय दक्षता (arithmetic competency) के बीच पाया जाता है।
- ASER 2024:
- कक्षा 5 के 48.7% छात्र कक्षा 2 के स्तर का पाठ पढ़ लेते हैं
- परंतु केवल 30.7% छात्र सामान्य भाग (basic division) हल कर पाते हैं
- यानी लगभग 18 प्रतिशत अंक का अंतर
गंभीर रूप से, कक्षा 8 के 50% से अधिक छात्र अब भी प्राथमिक स्तर का division हल नहीं कर पाते — यह सीखने की निरंतरता में गहरी कमी को दर्शाता है।
NAS (2021, 2023) भी राष्ट्रीय स्तर पर गणितीय प्रवीणता को 45% से नीचे दर्शाता है, जो TIMSS और PISA जैसे अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क की तुलना में स्पष्ट रूप से कमजोर स्थिति है।
2. भारत में Literacy–Numeracy Divide को बढ़ाने वाले संरचनात्मक कारण
(i) गणित का क्रमिक (hierarchical) स्वरूप
गणित में अवधारणाएँ एक-दूसरे पर आधारित होती हैं।
यदि छात्र number sense, place value, या four operations में दक्ष नहीं होते, तो आगे के अध्याय — decimals, fractions, algebraic reasoning — समझना कठिन हो जाता है।
इस कारण शुरुआती गलती आगे चलकर क्यूम्युलेटिव learning deficit बन जाती है।
(ii) सिलेबस-उन्मुख एवं गति-आधारित शिक्षण
कई विद्यालयों में शिक्षण-पद्धति अब भी “टेक्स्टबुक कैलेंडर” के अनुरूप चलती है, न कि छात्रों के सीखने के स्तर के आधार पर।
इससे कक्षा आगे बढ़ती रहती है, लेकिन अधिकांश छात्र पीछे छूट जाते हैं।
यह समस्या multi-grade classrooms में और तीव्र हो जाती है।
(iii) संरचित Remedial Support का अभाव
अधिकांश विद्यालयों में
- स्कैफोल्डिंग आधारित शिक्षण,
- स्तर आधारित समूह-निर्माण,
- या प्रणालीगत remedial periods
संस्थागत रूप से उपलब्ध नहीं होते।
इससे learning gaps समय के साथ और चौड़े हो जाते हैं।
(iv) गणित का वास्तविक जीवन से सीमित संबंध
शोध (J-PAL, ASER) दर्शाते हैं कि
- कई बच्चे परीक्षा में गणितीय प्रश्न हल कर सकते हैं
- परंतु वही अवधारणाएँ बाज़ार, नाप-तौल, पैसे या डिजिटल भुगतान में लागू नहीं कर पाते
यह transfer of learning की गंभीर कमी को प्रतिफलित करता है।
(v) शिक्षक प्रशिक्षण में अवधारणात्मक अंतर
अनेक प्राथमिक शिक्षक activity-based numeracy, concrete materials, manipulatives, number talk, और सामग्री आधारित शिक्षण (TLMs) से पर्याप्त रूप से परिचित नहीं होते।
परिणामस्वरूप, शिक्षण रटने-आधारित (procedural) रहता है, जबकि गणित के लिए conceptual understanding अनिवार्य होती है।
(vi) कोविड-19 के कारण उत्पन्न सीखने का व्यवधान
लंबे समय तक स्कूल बंद रहने का प्रभाव
- ग्रामीण
- निम्न-आय
- सरकारी विद्यालय
के छात्रों पर असमान रूप से पड़ा।
FLN क्षमताओं में आई गिरावट अभी भी कुछ राज्यों में पूरी तरह से सुधर नहीं पाई है।
3. कमजोर न्यूमरेसी के बहुआयामी प्रभाव
(i) माध्यमिक स्तर पर उच्च विफलता दर
Weak foundational numeracy →
Algebra, geometry, physics, quantitative reasoning कठिन हो जाते हैं →
Class 10 Maths और Science में failure दर बढ़ती है।
(ii) प्रारंभिक किशोरावस्था में Dropout बढ़ना
कक्षा 6–9 में विषय अमूर्त (abstract) होते जाते हैं।
जिन छात्रों की आधारभूत गणितीय समझ कमजोर होती है, वे कक्षा का अनुसरण नहीं कर पाते और विद्यालय छोड़ने की प्रवृत्ति बढ़ती है।
(iii) उच्च शिक्षा, विशेषकर STEM में सीमित अवसर
Class 10/12 गणित में असफल छात्र:
- विज्ञान स्ट्रीम,
- इंजीनियरिंग,
- पॉलिटेक्निक,
- तकनीकी डिप्लोमा,
- और अनेक प्रतियोगी परीक्षाओं
के लिए अयोग्य हो जाते हैं।
(iv) रोजगार क्षमता और वित्तीय साक्षरता में गिरावट
दैनिक जीवन से जुड़े कौशल जैसे
- बजट प्रबंधन
- डिजिटल भुगतान
- मापन
- तार्किक विवेक
कमज़ोर हो जाते हैं, जिससे job-readiness घटती है।
(v) दीर्घकालिक आर्थिक लागत
Weak numeracy वाला कार्यबल
- Innovation
- Productivity
- Value addition
को सीमित करता है और
देश की demographic dividend क्षमता को कमजोर बनाता है।
4. वर्तमान पहलें (Initiatives)
(i) NIPUN Bharat Mission (2021)
Classes 1–3 में FLN क्षमताओं को सार्वभौमिक बनाने का उद्देश्य।
(ii) Teaching at the Right Level (TaRL)
Level-based learning groups बनाकर foundational gaps भरने की प्रभावी पद्धति।
(iii) PARAKH राष्ट्रीय मूल्यांकन ढांचा
(iv) राज्य-स्तरीय FLN नवाचार
- कर्नाटक: Kalika Chetarike
- उत्तर प्रदेश: Mission Prerna
- दमन–दादरा: FLN को Upper Primary तक विस्तारित कर सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए
- Activity-based kits, manipulatives, digital FLN tools, teacher capacity building
5. आगे की राह (Way Forward): एक संरचनात्मक सुधार एजेंडा
(i) FLN को कक्षा 8 तक विस्तारित करना
जब मध्य-विद्यालय स्तर पर भी foundational gaps बने रहते हैं,
तो FLN केवल 1–3 तक सीमित नहीं रह सकता।
(ii) FLN+ कौशलों का विकास
Fractions, decimals, algebra readiness, word-problems जैसे higher-order numeracy कौशलों को बढ़ावा देना।
(iii) Learning-level आधारित, न कि grade-level आधारित शिक्षण
Competency-based teaching से धीमे सीखने वाले बच्चों को भी scaffolded learning मिलती है।
(iv) Remedial Learning, Peer Learning एवं Math Labs को संस्थागत रूप देना
Hands-on learning foundational misconceptions को ठीक करने में अत्यंत प्रभावी है।
(v) गणित को जीवन-परक (contextualised) बनाना
बजट, बाज़ार-गणित, measurement, digital payments आदि को कक्षा में सहज रूप से जोड़ना।
(vi) शिक्षक प्रशिक्षण में निरंतर व्यावसायिक क्षमता-विकास
- Conceptual pedagogy
- Visual and concrete tools
- Activity-based strategies
- Formative assessments
का प्रशिक्षण अनिवार्य बनाया जाए।
6. निष्कर्ष
भारत का न्यूमरेसी गैप केवल शैक्षिक चिंता नहीं है; यह मानव पूंजी, आर्थिक सशक्तिकरण, और सामाजिक समावेशन से गहराई से जुड़ा हुआ है।
यदि भारत को वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धी बने रहना है, तो FLN को प्राथमिकता देने के साथ-साथ numeracy-centric national agenda की आवश्यकता अत्यावश्यक है।
बुनियादी गणितीय दक्षता केवल एक विषय नहीं;
यह 21वीं सदी के कौशल, रोजगार क्षमता, और आर्थिक प्रगति की आधारशिला है।

