🌍 FAO की रिपोर्ट 2025: भूमि क्षरण, खाद्य सुरक्षा और सतत कृषि का वैश्विक परिप्रेक्ष्य
संयुक्त राष्ट्र की खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने वर्ष 2025 की अपनी प्रमुख वार्षिक रिपोर्ट “The State of Food and Agriculture 2025” प्रकाशित की है, जिसका शीर्षक है — “Addressing Land Degradation Across Landholding Scales.”
यह रिपोर्ट वैश्विक स्तर पर मानव-जनित भूमि क्षरण (Human-induced Land Degradation) की समस्या का गहन विश्लेषण करती है और इसके दूरगामी प्रभावों को खाद्य सुरक्षा (Food Security), जीविका (Livelihoods) और पर्यावरणीय स्थिरता (Environmental Sustainability) के संदर्भ में रेखांकित करती है।
🔹 भूमि क्षरण की अवधारणा (Concept of Land Degradation)
भूमि क्षरण का आशय है — भूमि की उत्पादकता और पारिस्थितिकीय कार्यक्षमता में वह गिरावट जो मानवीय या प्राकृतिक कारणों से उत्पन्न होती है।
FAO के अनुसार, भूमि क्षरण अब वैश्विक कृषि तंत्र की सबसे बड़ी बाधा बन चुका है, जो जलवायु परिवर्तन को तीव्र कर रहा है तथा सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में अवरोध उत्पन्न कर रहा है।
🔹 रिपोर्ट की प्रमुख तथ्यपरक निष्कर्ष (Key Empirical Findings)
- वैश्विक कृषि भूमि में उत्पादकता की गिरावट:
विश्व की लगभग 20% कृषि भूमि की उत्पादकता में निरंतर गिरावट दर्ज की गई है, विशेषकर एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में। - उपज-अंतर की गंभीरता:
उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया में 10 प्रमुख फसलों की उत्पादकता संभावित स्तर से 70% तक कम पाई गई — यह मृदा पोषण की कमी और अवसंरचनात्मक अभाव का परिणाम है। - मृदा जैविक कार्बन (Soil Organic Carbon) में ह्रास:
SOC में गिरावट के कारण मिट्टी की जल धारण क्षमता और सूक्ष्मजीव गतिविधि कम हो रही है, जिससे सूखा एवं बाढ़ प्रतिरोधक क्षमता घट रही है। - भूमि स्वामित्व में विषमता:
विश्व के 84% किसान 2 हेक्टेयर से कम भूमि पर कार्य करते हैं, जबकि कुल कृषि भूमि का 70% भाग शीर्ष 1% बड़े फार्मों के पास केंद्रित है। - भूमि परित्याग की प्रवृत्ति:
1992 से 2015 के बीच 60 मिलियन हेक्टेयर कृषि भूमि परित्यक्त हो चुकी है, जिससे ग्रामीण पलायन और खाद्य असुरक्षा बढ़ी है। - जलवायु–क्षरण चक्र:
क्षतिग्रस्त मिट्टियाँ अब ग्रीनहाउस गैसों का बड़ा स्रोत बन चुकी हैं, जिससे SDG 15.3 (Land Degradation Neutrality) के लक्ष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
🔹 रिपोर्ट की प्रमुख उपलब्धियाँ (Analytical Successes)
- Land Degradation Debt Model:
FAO ने एक नवीन Machine Learning आधारित मॉडल प्रस्तुत किया है जो भूमि की वर्तमान एवं प्राकृतिक स्थिति की तुलना करता है।
इसके अनुसार, मानव गतिविधियों से —- वृक्ष आवरण में 30% हानि,
- बायोमास कार्बन में 20% कमी,
- और मिट्टी अपरदन में 4 गुना वृद्धि हुई है।
- वैश्विक आर्थिक हानि का अनुमान:
भूमि क्षरण से विश्व को प्रतिवर्ष लगभग 300 अरब अमेरिकी डॉलर की आर्थिक क्षति हो रही है — यह भूमि पुनर्स्थापन (Restoration) में निवेश की आवश्यकता को रेखांकित करता है। - कृषि उपज और क्षरण का संबंध:
रिपोर्ट दर्शाती है कि भूमि क्षरण ऋण (Degradation Debt) में 10% वृद्धि होने पर कृषि उपज में 2% की गिरावट आती है। - बहु-स्तरीय नीति दृष्टिकोण:
FAO ने GAEZ v5 Dataset के माध्यम से छोटे और बड़े फार्मों की भूमि स्थिति का तुलनात्मक विश्लेषण कर “Scale-sensitive Policy Design” की संकल्पना प्रस्तुत की है।
🔹 रिपोर्ट में दर्शाई गई सीमाएँ (Identified Gaps and Failures)
- संस्थागत एवं तकनीकी क्षमता की कमी:
निम्न-आय वाले देशों में उपग्रह-आधारित निगरानी एवं तकनीकी विशेषज्ञता का अभाव है। - वित्तीय व नीतिगत असंगति:
Great Green Wall जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के बावजूद समन्वय की कमी एवं अल्पकालिक परियोजनाओं के कारण “Restoration Fatigue” उत्पन्न हो रही है। - स्थानीय एवं लैंगिक समावेशन की कमी:
अधिकांश पुनर्स्थापन कार्यक्रम SDG 8 (Decent Work) एवं SDG 13 (Climate Action) से अपर्याप्त रूप से जुड़े हैं, जिससे सामाजिक समावेशन घटा है। - स्वदेशी शासन प्रणालियों की उपेक्षा:
पूर्वी अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के Indigenous Stewardship Models के सफल उदाहरणों को नीति-निर्माण में पर्याप्त स्थान नहीं दिया गया।
🔹 मुख्य चुनौतियाँ (Major Challenges)
- भूमि असमानता और संसाधन एकाधिकार
- सतत कृषि निवेश में कमी (15% से भी कम)
- भूमि–जल–ऊर्जा नीति में असंगति
- डेटा और निगरानी तंत्र की कमी
- जलवायु जनित झटके — सूखा, बाढ़, मरुस्थलीकरण
🔹 FAO की नीतिगत सिफारिशें (Policy Recommendations)
| क्षेत्र | सिफारिश |
|---|---|
| नीति दृष्टिकोण | छोटे किसानों हेतु Payments for Ecosystem Services, बड़े फार्मों हेतु सतत इनपुट नियमन |
| निवेश नीति | सार्वजनिक–निजी भागीदारी के माध्यम से Carbon Farming और Regenerative Agriculture को बढ़ावा देना |
| सामुदायिक सहभागिता | Gender-sensitive और Community-led भूमि पुनर्स्थापन परियोजनाएँ |
| वैश्विक निगरानी ढांचा | Global Land Degradation Data Hub की स्थापना |
| SDG समेकन | राष्ट्रीय नीतियों को SDG 2 (Zero Hunger), SDG 13 (Climate Action), और SDG 15 (Life on Land) से जोड़ना |
🔹 भारत के संदर्भ में निहितार्थ (Implications for India)
भारत में लगभग 30% भूमि किसी न किसी रूप में क्षरणग्रस्त है।
FAO रिपोर्ट भारत के लिए तीन मुख्य सबक प्रस्तुत करती है:
- भूमि स्वास्थ्य कार्ड और मृदा संरक्षण मिशन को जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करना।
- जलवायु-स्मार्ट कृषि (Climate-smart Agriculture) को नीति ढाँचे में एकीकृत करना।
- स्थानीय समुदायों और महिला समूहों की भागीदारी को भूमि प्रबंधन की मुख्यधारा में लाना।
🔹 निष्कर्ष (Conclusion)
FAO की “The State of Food and Agriculture 2025” रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि भूमि क्षरण केवल एक पारिस्थितिक समस्या नहीं, बल्कि यह खाद्य सुरक्षा, सामाजिक समानता और जलवायु स्थिरता से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा विकासात्मक संकट है।
यदि वर्तमान प्रवृत्ति जारी रही, तो 2030 तक वैश्विक खाद्य प्रणाली में असंतुलन अपरिवर्तनीय हो सकता है।
इसलिए, नीति-निर्माण को “Science-driven, Equity-centered और Scale-sensitive” दृष्टिकोण अपनाना होगा, ताकि भूमि पुनर्स्थापन, कृषि उत्पादकता और जलवायु लचीलापन के बीच संतुलन स्थापित हो सके।
🔹 मुख्य परीक्षा उपयोगी बिंदु (For UPSC/PCS Notes):
- संस्था: FAO (Food and Agriculture Organization), Rome
- रिपोर्ट: The State of Food and Agriculture 2025
- थीम: Addressing Land Degradation Across Landholding Scales
- मुख्य संकेतक: 20% कृषि भूमि क्षरणग्रस्त; 300 अरब डॉलर वार्षिक हानि; शीर्ष 1% फार्मों के पास 70% भूमि
- मुख्य SDG लक्ष्य: SDG 2, 13, 15
- भारत के लिए निहितार्थ: भूमि पुनर्स्थापन = खाद्य सुरक्षा + जलवायु लचीलापन + ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण
